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        देशी(स्थानीय परंपरागत )और हाइब्रिड(कृतिम) बीज के अंतर को समझ लेना जरूरी है।
देशी बीज को हर साल अच्छे गुणवत्ता वाले फल से प्राप्त किया जाता है। बीज को हर बार बोने से फसल प्राप्त हो जाती है।पौधे में बीमारी कम आती है।किसानों का बीज किसानों के पास बना रहता है।

पड़े लिखे कृषि वैज्ञानिकों को किसानों की इस हरकत से रोजगार नहीं मिलता है। इसलिये बीजों से उत्पादन बड़ा देने के नाम पर छेड़छाड़ की गई।

इन जेनेटकली मोडीफाइड (GM seeds) बीजों में ज्यादा अंडे देने वाले जीव जैसे मछली ,मेड़क ,बिच्छू आदि और कुछ अन्य प्रजातियों के पौधों बीजों के साथ मिलाकर बीजों को कृतिम परिस्थितियों में तैयार किया गया। ऐसे अत्यधिक महंगे बीजों से उत्पादन ज्यादा हुआ।

ऐसे उत्पादन के लिये जहरीले कीटनाशक और रासायनिक खाद की जरूरत पड़ी। और खेती की लागत बड़ती चली गई।

जैसे टमाटर का साइज और बजन तो बड़ा पर टमाटर की खटास नहीं बड़ी ।टमाटर के पोषक तत्व नहीं बड़ सके ।
भोजन की मात्रा उतनी ही रही पर गुणवत्ता कम होती गई।
जहरीले रासायनों को खाने से हर परिवार में बीमारियां आती गई ।

अस्पतालों के खर्च बड़ते जा रहे है।अचानक आई बीमारियों का कारण भी यही है जो हरित क्रांति( लगभग 1970 )के पहले नहीं था।आज किस व्यक्ति को कौन सी बीमारी कब होगी कुछ नहीं कहा जा सकता। खेती की लागत बड़ने से किसान कमजोर हो रहा है।

और बीमारीयां बड़ने से परिवार कमजोर होते जा रहे है।
सभी असुरक्षित है।पंजाब की कैंसर ट्रेन और पैदा होने के पहले बीमारियां से घिर चुके बच्चे इस दुर्घटना के उदाहरण है।

किसानों की बीज और खाद के लिये कंपनीयो पर निर्भर रहना मजबूरी होता जा रहा है।

अस्पतालों से परिवारों को और बीज- कीटनाशक कंपनीयो के जाल से किसानों को बचाने के लिये नागपुर में 6 सालों से "बीजोत्सव" का आयोजन किया जा रहा है। इस साल भी

लगभग देश के लगभग 70 जैविक किसानों ने इसमें भागीदारी की। अधिकांश किसानों के पास अपने देशी बीज है और दूसरे किसानों के लिये देशी बीज संरक्षण में सहयोग कर रहे है। इन बीजों को आसानी से प्राप्त किया जा सकता है।
तमाम तरह के जैविक उत्पादन कर रहे किसानों को देखकर बहुत हिम्मत बड़ जाती है।

सरकारी सहयोग ना होने से ये किसान ज्यादा ईमानदारी से और बिना तामझाम के सहज रूप से जमीनी काम कर रहे है।

बीजोत्सव से कुछ बीजों को लाया गया है। जिन्हें फार्म डायरेक्ट बिलासपुर से प्राप्त किया जा सकता है।
     Sandeep Sharma 
     Prakriti Organics
       
       
        



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